टी20 विश्व कप: 2024 के गौरवशाली इतिहास से लेकर मौजूदा खिताबी रक्षा की चुनौतियों तक

भारतीय क्रिकेट टीम का टी20 सफर पिछले कुछ वर्षों में उतार-चढ़ाव और गौरवशाली क्षणों का गवाह रहा है। जहाँ एक तरफ टीम ने 2024 में एक लंबा इंतजार खत्म करते हुए विश्व कप के फाइनल में जगह बनाई थी, वहीं आज जब टीम अपने घर में खिताब बचाने की तैयारी कर रही है, तो कुछ पुरानी और नई चुनौतियां फिर से सिर उठा रही हैं।

2024 सेमीफाइनल: जब भारत ने इंग्लैंड से लिया था बदला

वर्ष 2024 के टी20 विश्व कप का वह सेमीफाइनल मुकाबला भारतीय क्रिकेट इतिहास के सुनहरे पन्नों में दर्ज है। गयाना में बारिश से बाधित उस मैच में भारतीय टीम ने गत चैंपियन इंग्लैंड को 68 रनों से करारी शिकस्त दी थी। यह जीत इसलिए भी खास थी क्योंकि भारत ने 2022 के सेमीफाइनल में मिली हार का बदला पूरा किया था। कप्तान रोहित शर्मा की 39 गेंदों पर 57 रन की कप्तानी पारी और सूर्यकुमार यादव के 47 रनों की बदौलत भारत ने मुश्किल पिच पर 7 विकेट खोकर 171 रन बनाए थे।

जवाब में इंग्लैंड की बल्लेबाजी ताश के पत्तों की तरह बिखर गई। भारतीय स्पिन आक्रमण के सामने इंग्लैंड के बल्लेबाज बेबस नजर आए। अक्षर पटेल और कुलदीप यादव ने मिलकर अंग्रेजों की कमर तोड़ दी। अक्षर ने अपनी शानदार गेंदबाजी और फील्डिंग से मैच का रुख पलट दिया था, जिसके लिए उन्हें ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया। कुलदीप यादव ने भी तीन विकेट झटके और इंग्लैंड पूरी टीम महज 103 रनों पर सिमट गई। इस जीत के साथ भारत ने 10 साल बाद टी20 विश्व कप के फाइनल में प्रवेश किया था, जहाँ उनका मुकाबला दक्षिण अफ्रीका से तय हुआ था।

बदलाव का दौर और नई रणनीति

उस ऐतिहासिक जीत के बाद से भारतीय टीम में काफी बदलाव आए हैं। अब टीम की कमान सूर्यकुमार यादव के हाथों में है और मुख्य कोच गौतम गंभीर हैं। लंबे समय तक भारतीय टीम को टी20 फॉर्मेट में रक्षात्मक बल्लेबाजी के लिए आलोचना झेलनी पड़ी थी। नए नेतृत्व में टीम ने एक अति-आक्रामक (अल्ट्रा-एग्रेसिव) क्रिकेट खेलने की रणनीति अपनाई। बल्लेबाजी क्रम में ऐसे खिलाड़ियों को शामिल किया गया जो पहली गेंद से ही प्रहार कर सकें।

हालाँकि, आगामी टी20 विश्व कप में जब खिताब बचाने के लिए दो महीने से भी कम का समय बचा है, यह आक्रामक रणनीति ही चिंता का विषय बनती जा रही है। टीम प्रबंधन, जो हमेशा से बल्लेबाजी की गहराई पर भरोसा करता आया है, उसे अब अपनी रणनीतियों पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता महसूस हो रही है।

बल्लेबाजी में निरंतरता का अभाव

धर्मशाला में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हाल ही में खेले गए तीसरे टी20 मुकाबले में मिली जीत और पिछले कुछ महीनों के प्रदर्शन पर नजर डालें, तो पता चलता है कि शीर्ष क्रम में अभिषेक शर्मा को छोड़कर अन्य बल्लेबाजों में निरंतरता की भारी कमी है। स्ट्राइक रेट लगातार गिर रहे हैं और ऐसा लगता है कि टीम अब बड़े स्कोर वाले मैचों के बजाय कम स्कोर वाले मुकाबलों में ज्यादा सहज महसूस कर रही है। एशिया कप से लेकर अब तक, भारत ने अधिकांश जीत उन मैचों में दर्ज की हैं जहाँ लक्ष्य 160 रन से कम रहा है।

अभिषेक शर्मा का उदय और सीनियर खिलाड़ियों का संघर्ष

युवा सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा ने अपनी आक्रामक शैली से प्रभावित किया है। रविवार को मिली 7 विकेट की जीत के बाद उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका काम टीम को तेज शुरुआत देना है ताकि अन्य बल्लेबाज अपना समय ले सकें। लेकिन चिंता की बात यह है कि जब अभिषेक (18 गेंदों में 35 रन) आउट हुए, तो बाकी के 58 रन बनाने में अन्य बल्लेबाजों ने 10 ओवर से ज्यादा का समय ले लिया।

कप्तान सूर्यकुमार यादव और उप-कप्तान शुभमन गिल की खराब फॉर्म आजकल चर्चा का विषय बनी हुई है। पिछले 14 मैचों में तिलक वर्मा का स्ट्राइक रेट 120 से नीचे रहा है, जो टी20 के लिहाज से चिंताजनक है। बल्लेबाजी क्रम में बार-बार हो रहे बदलावों के कारण अन्य खिलाड़ी भी सेट नहीं हो पा रहे हैं। संजू सैमसन की वापसी की मांग के बीच, उनके आंकड़े भी इंग्लैंड की तेज गेंदबाजी के सामने बहुत उत्साहजनक नहीं रहे हैं। हालाँकि, अभिषेक शर्मा ने गिल और सूर्या का बचाव करते हुए विश्वास जताया है कि ये दोनों ही खिलाड़ी विश्व कप में मैच विनर साबित होंगे।

गेंदबाजी बनी टीम की असली रीढ़

जहाँ एक तरफ बल्लेबाजी उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पा रही है, वहीं पिछले 12 महीनों में गेंदबाजी विभाग ने टीम को एकजुट रखा है। जसप्रीत बुमराह, अर्शदीप सिंह, हार्दिक पांड्या और विशेष रूप से वरुण चक्रवर्ती की चौकड़ी किसी भी बल्लेबाजी आक्रमण को ध्वस्त करने का माद्दा रखती है। वरुण चक्रवर्ती की वापसी और उनकी ‘मिस्ट्री स्पिन’ टीम के लिए वरदान साबित हुई है।

धर्मशाला में वरुण ने साबित कर दिया कि वे किसी भी परिस्थिति में शानदार गेंदबाजी कर सकते हैं। उनकी गेंदों को पढ़ना बल्लेबाजों के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। अगर बल्लेबाजी नहीं सुधरी, तो आगामी विश्व कप में भारत की उम्मीदें काफी हद तक इसी गेंदबाजी आक्रमण पर टिकी होंगी, जो कम स्कोर को भी डिफेंड करने की क्षमता रखता है। ठीक वैसे ही जैसे 2024 में कुलदीप और अक्षर ने किया था, अब वरुण और बुमराह की जोड़ी भारत के विजय रथ को आगे बढ़ाने का जिम्मा संभाले हुए है।