Home Samachar Vishesh रुक गइल नीलामी... सब केहु के धन्यवाद...

रुक गइल नीलामी... सब केहु के धन्यवाद...

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पटना/जमशेदपुर। अभी-अभी दुबई से नवीन भाई के फोन आइल ह - "राजेंद्र बाबु के घड़ी के नीलामी रुक गइल।" एतना सुनते-सुनते उनका दिल के भावना हमरा आँखि से लोर बनि के तैर गइल। मने, एक बेर फेर हमनी का जीत गइनी, एगो अउर लडाई...। एह खबर पर प्रतिक्रिया कइसे व्यक्त कइल जाव, ई त पता ना, लेकिन हाँ, आज गर्व होता, एह मुहिम के सफलता पर।
 
वइसे त भोजपुरिया डॉट कॉम (अउर जय भोजपुरी डॉट कॉम) के नावें पता ना कई गो सफलता दर्ज बाडी सन, लेकिन ई उपलब्धि खास बा, काहें कि एह बेर हमनी का सरकार के ऊ सोचवा देहनी जा, जवन कि भोजपुरिया समाज चाहत रहे। एह मौका पर सबसे पहिले हमनी का धन्यवाद दिहल चाहेब बिहार-झारखंड के अग्रणी अखबार "प्रभात खबर" के, जे हमनी के एह मुद्दा के ना सिर्फ आपन मुद्दा बनवलस, बल्कि लगातार एह मुद्दा पर जनता के जागरुक बनाये के काम कइलस। एकरा अलावा जय भोजपुरी परिवार के सक्रिय सदस्य संजय कुमार सिंह, अउर सिवान के सांसद ओमप्रकाश यादव के योगदान भी उल्लेखनीय बाटे।
 
जब पहिला बेर राजेंद्र बाबु के घड़ी के नीलामी के खबर हमनी का सुनले रहनी, तब लागल रहे कि केहु हमनी के आत्म-सम्मान के, हमनी के संस्कार के, अउर हमनी के गौरवशाली इतिहास के नीलाम करे जा रहल बाटे। मीडिया में कुछ लोगन से चर्चा कइनी, लेकिन ऊ लोग कहल कि "जब गाँधी जी के सामान के नीलामी केहु ना रोक पावल, त फेर राजेंद्र बाबु के घडी के नीलामी कइसे रुकी?"
 
जय भोजपुरी परिवार के वरिष्ठ सदस्यन से सलाह कइला के बाद हमनी का फैसला कइनी जा कि हमनी का लोगन के जागरुक करब जा, अउर भारत सरकार के विदेश मंत्रालय समेत जिनेवा स्थित भारत सरकार के राजदुतावास के ई-मेल भेजे के सिलसिला शुरु भइल। शुरुआत में हमनी के पता ना रहे कि एकर परिणाम का होई, लेकिन जइसे कि टाइम्स ऑफ इंडिया लिखले बाटे - "भारी संख्या में मिल रहल ई-मेल पर गौर कइला के बाद भारत सरकार ई फैसला कइलस कि चोरी से देश से बाहर गइल एह घडी के नीलामी रोके के चाहीं।" भारत सरकार के पत्र पर गौर कइला के बाद आज नीलामी घर "सथबी" राजेंद्र बाबु के घडी के नीलामी टाले के फैसला कइले बाटे। आज, एह सफलता पर हमनी का जय भोजपुरी परिवार के सदस्यन समेत हर ओह आदमी के धन्यवाद दिहल चाहेब, जे एह अभियान में कवनो तरह से आपन सहयोग दिहल।
 
ई हमनी के जीत हवे, हमनी के समाज के जीत हवे, हमनी के एकता के जीत हवे, अउर एह से आज एक बेर फेर पता चलल कि "कौन कहता है कि आसमान में सूराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो जरा तबियत से उछालो यारों...।" पहिला राउंड त हमनी का जीत गइल बानी जा, लेकिन हमनी के समाज खातिर, आ समूचा भारत खातिर ई जीत तब ले अधुरा बा, जब ले देश के पहिला राष्ट्रपति के ई घडी वापस देश में नइखे आ जात।

ई घडी के वापस ले आये खातिर विदेश मंत्रालय, भारत सरकार के चिठ्ठी (ईमेल आईडी- This e-mail address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it अउर This e-mail address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it ) लिखीं, अउर ओकर एगो कॉपी (CC) स्वीटजरलैंड स्थित भारतीय दूतावास (मेल आईडी- This e-mail address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it ) के भेजीं। रउआ चिठ्ठी के प्रारुप एहिजा देख सकेनी।



Dear Sir,

We had heard from several newspapers that our beloved First President of India Dr. Rajendra Prasad's wrist watch is going to be auctioned at Geneva. As an Indian, this hurts our sentiments, and all efforts should be made to bring-back this historical watch.

Since the watch was stolen from his house, and this particular gift (watch was gifted by Rolex) is very close to our heart, we would like to request you to stop auction of this National Asset, and bring-back the same to India.

Thanking You.
Regards,
 


आईं, एह अधूरा जीत के पूरा बनावल जाव... आईं, देश खातिर कुछ कइल जाव...