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बिक चुका है बक्सर का मीडिया

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बक्सर। मीडिया को समाज का आइना और लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ माना जाता है, लेकिन जब वही मीडिया समाज को गुमराह करना शुरु कर दे, निष्पक्षता की राह छोड कर कुछ खास लोगों के फायदे की बात लिखना शुरु कर दे, और गुनाहगारों को बचाने की कोशिश शुरु कर दे, तो इसे क्या कहा जाएगा? आज बक्सर में रहने वाला हर शख्स इस बात को भली-भांति जान चुका है, कि उनके शहर का मीडिया ना सिर्फ बिक चुका है, बल्कि एक व्यक्ति विशेष की चरण-वंदना में भी लगा हुआ है।

बक्सर के गली-चौराहों पर युवा वर्ग के बीच यह चर्चा आम हो चुकी है कि आखिर किस फायदे के लिए मीडिया भोजपुरी अकादमी के चेयरमैन रवि कांत दुबे को बचाने के लिए जी-जान लगा रहा है। आखिर ऐसी क्या वजह है कि पिछले एक हफ्ते में हर उस खबर को मीडिया बडी खबर बना रहा है, जिससे रवि कांत दुबे का कद बढ रहा हो, लेकिन उनके खिलाफ उठ रही हर आवाज को मीडिया दबाने की पुरजोर कोशिश कर रहा है।

उदाहरण के तौर पर भोजपुरिया डॉट कॉम पर जब रवि कांत दुबे द्वारा लडकियों की फेक प्रोफाइल चलाये जाने की खबर आई, और उस खबर को स्थानीय मीडिया को सारे सबूतों के साथ दिया गया, तब भी किसी ने उस पर लिखने की कोशिश नहीं की। कुछ पत्रकारों ने तो दो कदम आगे बढ कर बकायदा उसके कानूनी पहलू की माँग कर दी, जबकि वही पत्रकार विकीलीक्स और अन्य वेबसाइटों पर छप रही खबरों को बेधडक छापते हैं। जब वहाँ की मीडिया ने यह सच छापने का साहस नहीं दिखाया, तो बक्सर की जनता ने उस खबर को वेबसाइट से प्रिंट कर के पूरे बक्सर की दिवारों पर चिपका दिया। अगले दिन सुबह पूरा बक्सर रवि कांत दुबे की इस घृणित हरकत पर थू-थू कर रहा था, और एक टीवी चैनल ने इन इस्तेहारों पर एक खबर भी चलाई, लेकिन बक्सर के अखबारों के लिए इस खबर की कोई अहमियत नहीं थी।

इसके ठीक अगले दिन भाजपा के जिलाध्यक्ष केदार नाथ तिवारी ने सभी अखबारों में प्रेस-विज्ञप्ति भेज कर सरकार से रवि कांत दुबे को बर्खास्त करने की मांग की, लेकिन अखबारों ने इसे छापना भी उचित नहीं समझा। हद तो तब हो गई जब कल भोजपुरी साहित्य मंडल ने बकायदा एक प्रेस-कांफ्रेस कर रवि कांत दुबे के इस्तीफे की मांग की, लेकिन कुछ अखबारों ने उस प्रेस कांफ्रेस में अपने प्रतिनिधियों को भेजना भी उचित नहीं समझा। कुछ अखबारों के प्रतिनिधि वहाँ गये, लेकिन एकाध को छोडकर हर अखबार ने खबर जो दबाने की कोशिश की।

इस पूरे प्रकरण में सबसे मजे की बात यह है कि रवि कांत दुबे के विरोध में आने वाली खबरों से परहेज कर रहा बक्सर का मीडिया उस दिन खुल कर सामने आया, जिस दिन रवि कांत दुबे ने भोजपुरिया डॉट कॉम के संचालकों के खिलाफ स्थानीय अदालत में पाँच लाख की रंगदारी माँगने का एक झुठा मुकदमा दर्ज कराया। उस दिन स्थानीय अखबारों द्वारा उस खबर को बडी खबर की तरह प्रोजेक्ट किया जाना, और उसी प्रकरण की बाकी खबरों को नजरअंदाज करना मीडिया की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है। मीडिया के इस दोगले आचरण के खिलाफ बक्सर के युवा वर्ग में खासा आक्रोश है, जिसका विस्फोट बक्सर की सडकों पर निकट भविष्य में कभी भी देखा जा सकता है।

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Comments (7)
बक्सर के भडुवे पत्रकार
1 Sunday, 24 April 2011 12:26
Sonu Tiwari
जब बक्सर के भडुवे पत्रकार अय्यश रवि कान्त के साथ बैठ के बोटी शराब और गर्म गोस्त की प्लानिंग करते हैं तो आप उनसे रवि कान्त की खिलाफत की बात कैसे सोच सकते हो.
बिक चुका है.....
2 Sunday, 24 April 2011 22:07
Rajesh ojha
बक्सर के मीडिया त कहिये ले बिकल बा. एकर एगो आउरो प्रमाण दे देलस.जब तक ओहिजा के पत्रकार बिरादरी में अगाध, कंचन, निशांत जैसन लोग रहिहन तब तलक आलम इहे रही.
midia
3 Monday, 25 April 2011 17:28
Tilakraj Yadav
बिका हुआ क नाम ही मीडिया हॅव और बिकना ही ओकर नाव हॅव ! ई बहुत पूरण बात बा |
reaction
4 Tuesday, 26 April 2011 17:44
kanchan
प्रिय सुधीर जी आपके बेवसाइट से मैं भोजपुरी आंदोलन के परिप्रेक्ष्‍य में जुडा। किसी घटना या विषय को लेकर मीडिया कर्मियों का नजरिया अलग-अलग हो सकता है लेकिन मीडिया के माध्‍यम से जो बातें समाज तक जा रही हैं उनका प्रस्‍तुतिकरण मर्यादित भाषा में होना चाहिये। आपके माध्‍यम से किसी सम्‍मानित जन ने जो टिप्‍पणी की है उनसे मैं अनुरोध करता हूं कि कभी हमसे मिलें। मैं विश्‍वास दिलाता हूं कि इसके बाद मेरे प्रति उनका ख्‍याल बदल जायेगा। केवल सामान्‍य परसेप्‍शन के आधार पर किसी के बारे में राय नहीं तैयार करें।
शर्म आनी चाहिए एसे लोगो को
5 Tuesday, 26 April 2011 21:47
श्री कान्त
मीडिया में रह के एस तरह पक्छ्पात की घटिया हरकत करने वाले लोगो की बजह से ही सारी मीडिया कलंकित होती है ,शर्म आनी चाहिए एसे लोगो को
बिहारी पत्रकार
6 Tuesday, 26 April 2011 21:51
Rajt Shamra
बिहारी पत्रकारों की साख पुरे देश में अच्छी है फिर बिहार में ही ऐसा क्यों?
एह पब्लिक है सब जानती है.....
7 Saturday, 30 April 2011 12:02
रजत शर्मा
कंचन जी

रवि कान्त दुबे द्वारा किये गए मुकदमे के सम्बन्ध में दैनिक जागरण में आप के ही नाम से समाचार छपा हुवा था.जब की उस से पहले रवि कान्त दुबे के कारनामो की समाचार भोजपुरिया पर थी तब भी आप ने पक्छ्पात तरीके से रवि कान्त दुबे के तरफ का ही समाचार लिखा...

चलिए अगेर उस बात को छोर भी दे तब उस घटना के बाद रवि कान्त दुबे के झूठे चरित्र अपने परिवार को प्रताड़ित करने का प्रमाणपत्र पोलिसे के आला अधिकारियो द्वारा मिल चूका hai ...अब उस के बारे में लिखने की हिम्मत है आप में ?? अगर नहीं तो अपने तरीके से काम कीजिये यहाँ आ कर लोगो को उपदेश मत दीजिये ...एह पब्लिक है सब जानती है...
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