जमशेदपुर। भोजपुरी के हर एक कार्यक्रम की शुरुआत में एक बात जो प्रमुखता से उठाई जाती है, वह है भोजपुरी का अंतर्राष्ट्रीय स्वरुप। भोजपुरी के सभी साहित्यकार और शुभचिंतक इस बात लेकर गौरवांवित रहते हैं कि भोजपुरी एक ऐसी भाषा है, जो भारत के अलावा मॉरीशस, सूरीनाम, फिजी, नेपाल समेत करीब डेढ दर्जन देशों में बोली जाती है। लेकिन इस बार भोजपुरी अकादमी के अध्यक्ष की एक करतूत ने अमेरिका समेत विश्व भर में समस्त भोजपुरी-भाषियों का सिर शर्म से झुका दिया है। जी हाँ, बक्सर से लेकर पटना तक येन-केन-प्रकारेण मीडिया में अपना नाम छपवाने को आतूर रहने वाले भोजपुरी अकादमी के अध्यक्ष डा. रविकांत दुबे पर एक प्रतिष्ठित अमेरिकी लेखक मुकदमे की तैयारी कर रहा है।
यहाँ यह याद दिलाना जरुरी होगा कि पिछले वर्ष भोजपुरिया डॉट कॉम ने रवि कांत दुबे द्वारा इंटरनेट से कॉपी कर के अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा पर एक किताब और एक रिसर्च जर्नल (सैद्धांतिकी) में आलेख लिखने का खुलासा किया था। उस खुलासे के बाद दुबे ने दावा किया था कि किसी भी लेखक ने (जिसके आलेख कॉपी किये गये थे) आज तक उनसे शिकायत नहीं की, और उन्होने यह कह कर खुद को पाक-साफ साबित करने की कोशिश की थी कि किताब के अंत में रेफरेंस में सबका नाम दिया गया था। सोचने वाली बात यह है कि आखिर अमेरिका तक उनकी इस कॉपी/पेस्ट वाली किताब पहुंचती कैसे, और जब कोई किताब पढता ही नहीं, तो फिर वह शिकायत कैसे करता? लेकिन, अब इसे दुबे की बदकिस्मती कहें या कुछ और, लेकिन शायद इंटरनेट ने चीजों को काफी आसान बना दिया है।
एक प्रतिष्ठित अमेरिकी विश्वविधालय में डीन और प्रसिद्ध अमेरिकी लेखक रॉबर्ट हैचिंग्स (जिनके आलेख को दुबे ने ना सिर्फ किताब में, बल्कि एक रिसर्च जर्नल में भी अपने नाम से छपवाया) ने दुबे की इस चोरी पर खासा एतराज जताया है, और उनके द्वारा भेजे एक ई-मेल (निचे देखें) में यह साफ-साफ लिखा गया है कि अगर किसी का नाम रेफरेंस में दिया भी गया हो, तो इसका मतलब यह नहीं है कि आप उसके आलेख कॉपी कर के अपने नाम पर छपवा सकते हैं। अपने ई-मेल में रॉबर्ट ने लिखा है कि वो दुबे की उस किताब की प्रति तलाश रहे हैं, और रिसर्च जनरल "सैद्धांतिकी" में छपे दुबे के आलेख को देख कर वह सदमे में हैं, जहां दुबे ने उनके लिखे हुए आलेख के नौ पैराग्राफ अपने नाम से छपवा लिए। इस तरह की चोरी पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए राबर्ट लिखते हैं - "कोई भी प्रतिष्ठित लेखक/शिक्षाविद किसी और के लिखे हुए को इस तरह अपने नाम से नहीं छपवा सकता। कोई भी प्रतिष्ठित रिसर्च जर्नल इस तरह की चीजों को नहीं छाप सकता, और कोई भी विश्वविधालय इस तरह के आचरण (चोरी) को बर्दास्त नहीं कर सकता।"
बराक ओबामा पर रवि कांत दुबे की किताब के कुछ पन्ने (स्कैन किये गये) देखने के बाद ई-मेल (निचे देखें) में राबर्ट के गुस्से को इस बात से समझा जा सकता है कि उन्होंने सिधे शब्दों में दुबे के खिलाफ कार्यवाही करने की बात कही है - "मेरी जानकारी में आज तक किसी लेखक द्वारा चोरी की यह सबसे घटिया और दुस्साहसिक घटना है। मुझे हर्जाने (जो कॉपीराइट एक्ट के तरह उन्हें मिलना चाहिए) की परवाह नहीं है लेकिन मैं इस व्यक्ति (दुबे) को इस काम के लिए दोषी ठहराना चाहता हूँ, भले ही इसके लिये मुझे कुछ भी करना पडे।"


दुबे के खिलाफ यह कार्यवाही ना सिर्फ उस मुद्दे की सत्यता को उजागर करती है, जो भोजपुरिया डॉट कॉम ने पिछले साल उठाया था, बल्कि यह घटना इस कथन को भी सत्यापित करती है कि, कोई भले ही लाख जतन कर ले, लेकिन झुठ और चोरी एक दिन जरुर पकडी जाती है। देखने वाली बात यह है कि क्या एक प्रसिद्ध अमेरिकी शिक्षाविद की यह बात बिहार की सुशासन सरकार पर कोई असर डाल पाती है? क्या एक चोर को एक ऐसी संस्था (भोजपुरी अकादमी) का अध्यक्ष बनाया रखा जाएगा, जो लेखकों, साहित्यकारों और शिक्षाविदों को प्रोत्साहित करने के लिये बनाई गई हो? क्या बिहार के मीडिया की आँख अब भी खुलती है...? क्या भोजपुरिया समाज ऐसे चोर को और बर्दास्त करेगा, जिसकी वजह से विदेशों में भी समाज की नाक कट रही हो? सवाल तो और भी बहुत सारे हैं, लेकिन...



अब जरूरत बावे कि रॉबर्ट हैचिंग्स के लगे केहु त हमनी रवि कांत दुबे द्वारा लिखल ( चोरावल) किताब के एगो प्रती पहुँचावल जाव। तबही ऐह बहरूपीया के असल रूप दुनिया के सामने आई।
जय भोजपुरी
- "मेरी जानकारी में आज तक किसी लेखक द्वारा चोरी की यह सबसे घटिया और दुस्साहसिक घटना है। मुझे हर्जाने (जो कॉपीराइट एक्ट के तरह उन्हें मिलना चाहिए) की परवाह नहीं है लेकिन मैं इसव्यक्ति (दुबे) को इस काम केलिए दोषी ठहराना चाहता हूँ,भले ही इसके लिये मुझे कुछ भी करना पडे।"