रणवीर सेना बिहार के एगो संगठन हवे, जेकर उद्देश्य बड़ जमींदारन अउर ओह लोगन के जमीन के रक्षा कइल रहे, जे नक्सलियन के आतंक से त्रस्त रहे। रणवीर सेना के स्थापना 1994 में मध्य बिहार के भोजपुर जिला के बेलाऊर गांव में भइल रहे। एकर स्थापना के पीछे के प्रमुख वजह बिहार के सवर्ण अउर मध्यम वर्ग के किसानन के भाकपा-माले नामक नक्सली संगठन से त्रस्त भइल रहे।ओह घरी बिहार के हालात अइसन रहे कि अक्सर माले जइसन प्रतिबंधित संगठन के लोग कवनो जमींदार/ किसान के जमीन पर लाल झंडा लगा देत रहे, अउर ओह किसान के धमकी दिहल जात रहे कि अगर ऊ दोबारा ओह जमीन पर पहुंचल, त ओकरा के खतम कइ दिहल जाई। एह हालात में पुलिस-प्रशासन के सहयोग ना मिलला से परेशान ई किसान लोग एगो विकल्प के तलाश में रहे। इहे किसान लोग मिल के छोट-छोट बइठक के जरिये एगो संगठन के रूपरेखा तैयार कइल, अउर ओकरा बाद बेलाऊर (आरा) के मध्य विद्यालय के प्रांगण में एगो बड़हन किसान रैली कइ के "रणवीर किसान महासंघ" के गठन के ऐलान कइल गइल। ओह घरी खोपिरा के पूर्व मुखिया बरमेश्वर सिंह समेत कई लोग एह संगठन के निर्माण में अगुआ के तौर पर सामने आइल।
इ लोग गांव-गांव जाके किसानन के माले के अत्याचार के खिलाफ उठे खातिर प्रेरित कइल। शुरुआत में एह लोगन के साथ लाईसेंसी हथियार वाला लोग ही जुटल, लेकिन फेर वाद में अवैध हथियारन के जखीरा भी जमा होखे लागल। भोजपुर समेत पुरा बिहार के वइसन किसान एह संस्था से जुडलन, जे नक्सलियन के आर्थिक नाकेबंदी झेलत रहलन। जवना समय रणवीर किसान संघ बनल, ओह घरी भोजपुर के कई गांवन में भाकपा माले लिबरेशन के लोग आम किसानन के खिलाफ आर्थिक नाकेबंदी लगा देले रहे। करीब पांच हजार एकड़ जमीन परती पड़ल रहे, अउर ओह पर खेती करे के मतलब जान से हाथ धोवल रहे। पुलिस प्रशासन का लगे कवनो सुनवाई ना रहे। कई गांवन में खुलेआम फसल के जरा दिहल जात रहे, अउर किसानन के शादी-बियाह नियन समारोह आयोजित करे में नक्सली लोग दिक्कत करत रहे। ई परिस्थिति किसानन के एकजुट होके प्रतिकार करे के माहौल तैयार कइलस, अउर रणवीर सेना के गठन के इहे जमीनी हकीकत हवे। भोजपुर में संगठन बनला के बाद पहिला नरसंहार सरथुआं गांव में भइल, जहंवा एगो जाति-विशेष के पांच लोगन के हत्या कइ दिहल गइल, ओकरा बाद त जइसे नरसंहारन के सिलसिला हीं चल पड़ल।
सवर्ण लोगन के एह सेना पर बिहार सरकार तत्काल प्रतिबंधित लगा दिहलस, लेकिन हिंसक गतिविधियन के दौर जारी रहल। प्रतिबंध के बादो रणवीर संग्राम समिति के नाम से एकर हथियारबंद दस्ता विचरण करे लागल। दरअसल भाकपा माले ही एह संगठन के रणवीर सेना के नांव दिहलस, अउर एकरा के सवर्ण सामंतन के बर्बर सेना कहल जाये लागल। एक ओर भाकपा माले के दस्ता खून बहावत रहे, त दोसरा ओर प्रतिशोध में रणवीर सेना के हत्यारा लोग खून के होली खेलत रहे। करीब पांच साल तक चलल एह हिंसा-प्रतिहिंसा के लड़ाई के बाद धीरे-धीरे शांति लवटल, लेकिन एह बीचे मध्य बिहार के जहानाबाद, अरवल, गया, औरंगाबाद, रोहतास, बक्सर अउर कैमूर जिला में रणवीर सेना आपन प्रभाव बढ़ा लिहले रहे।
दोसरा ओर अगर माले के बात कइल जाव त ऊ खुद के गरीबन के हितैषी बतावत रहे, उनका हित खातिर लडे के दावा करत रहे। ओह लोगन के हिसाब से जब सवर्ण लोगन के अत्याचार गरीबन पर बढ़ल, त नक्सली लोग उनकर सहयोग कइल, अउर उनका के उनकर हक दिलाये के कोशिश कइल। एही वजह से ऊ लोग खून खराबा करत रहे, अउर एही जद में कई गो बेगुनाह लोग भी आइल। कुल मिलाके कहल जाव त नक्सली अउर रणवीर सेना, दूनो सरकार के सीधे चुनौती देत हर मामला के अपना तरीका से सुलझाने में लागल रहे, जेकरा वजह से सरकार दूनो के प्रतिबंधित कइ दिहलस।
नब्बे के दशक में रणवीर सेना अउर नक्सली संगठन एक दूसरा के ख़िलाफ़ कई गो बड़हन कार्रवाई भी कइले सन, जवना में सबसे बडहन रहे लक्ष्मणपुर बाथे नरसंहार। एक दिसंबर 1997 के भइल एह नरसंहार में 58 दलित लोगन के मार दिहल गइल रहे, अउर एह घटना में भी मुखिया के मुख्य अभियुक्त मानल गइल रहे। ई नरसंहार बाड़ा नरसंहार के प्रतिशोध मानल गइल, जवना में नक्सली लोग ऊंच जाति के 37 लोगन के मरले रहे। एकरा अलावा मुखिया बथानी टोला नरसंहार में अभियुक्त रहलन, जवना में उनका के नाटकीय ढंग से 29 अगस्त 2002 के पटना के एक्जीविसन रोड से गिरफ्तार कइल गइल। ओह समय उनका पर पांच लाख रुपया के ईनाम रहे, अउर ऊ जेल में करीब नौ साल रहलन। बथानी टोला मामला में सुनवाई के दौरान पुलिस कहलस कि मुखिया फरार बाडन, जबकि मुखिया ओह घरी जेल में रहलन। एह मामला में मुखिया के फरार घोषित कइला का कारण उनका सजा ना भइल, अउर ऊ आठ जुलाई 2011 को रिहा भइलन। बथानी टोला मामला में ऊ अभियो फरार घोषित बाडन, अउर मामला अदालत में बाटे।
करीब 277 लोगन के हत्या से संबंधित 22 अलग अलग आपराधिक मामला (नरसंहार) में इनका के अभियुक्त मानल जात रहे। जेल से छूटला के बाद ऊ 5 मई 2012 के "अखिल भारतीय राष्ट्रवादी किसान संगठन" के नाम से संस्था बनवलन अउर कहलन कि ऊ मरते दम तक किसानन के हित के लड़ाई लड़त रहिहन। जब मुखिया आरा जेल में बंद रहलन, तब ऊ बीबीसी से एगो इंटरव्यू में कहलन कि किसानन पर हो रहल अत्याचार के लगातार अनदेखी हो रहल बाटे। मुखिया के कहनाम रहे कि ऊ किसानन के बचाये खातिर संगठन बनवले रहलन, लेकिन सरकार उनका के निजी सेना चलाये वाला कहके अउर उग्रवादी घोषित कइ के प्रताड़ित कइलस। उनका अनुसार किसानन के नक्सली संगठनों के हथियारों के सामना करे के पड़त रहे, अउर हथियार उठवला का सिवा ओह लोगन का लगे अउर कवनो रास्ता ना रहे।
संगठन के जमीनी पकड के अंदाजा एही बात से लगावल जा सकेला कि "अखिल भारतीय राष्ट्रवादी किसान महासंघ" के पहिला अध्यक्ष अउर जगदीशपुर के इचरी निवासी किसान रंग बहादुर सिंह आरा लोकसभा सीट से चुनाव लड़लन अउर एक लाख के आसपास वोट पवलन। एकरा अलावा जेल में रहते समय मुखिया भी लोकसभा के चुनाव लड़लन, अउर डेढ लाख वोट लाके आपन ताकत के एहसास करवलन। पिछला करीब एक दशक से रणवीर सेना के कवनो गतिविधि नइखे लउकत, लेकिन एह संभावना से इंकार नइखे कइल जा सकत कि मुखिया के हत्या एह संगठन के खूनी खेल के दोबारा ना शुरू कइ देव। (विकिपीडिया)


