बक्सर। भोजपुरिया डॉट कॉम के संचालक और कुछ अन्य लोगों पर झूठा मुकदमा कर चर्चा में आये भोजपुरी अकादमी के अध्यक्ष रवि कांत दुबे की भोजपुरी अकादमी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में नियुक्ति के मामले में बिहार सरकार भी घिरती नजर आ रही है। साहित्यकारों के एक वर्ग में यह चर्चा आम है कि एक साधारण से चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी की नियुक्ति के समय उसका चरित्र प्रमाण पत्र माँगने वाली सरकार ने आखिर इतने बडे पद पर रवि कांत दुबे की नियुक्ति से पहले उनके चरित्र और आचरण के बारे में लिखी गई जाँच रिपोर्ट को कैसे दरकिनार कर दिया? आखिर किस आधार पर बिहार के एक आईजी (पुलिस महानिरिक्षक) की रिपोर्ट और बिहार पुलिस द्वारा एक स्थानीय अदालत को सौंपी गई अनुसंधान रिपोर्ट को इग्नोर किया गया, जिसमें रवि कांत दुबे को झूठा और आपराधिक प्रवृति वाला बताया गया था, और उनके खिलाफ भारतीय दंड विधान की धारा 182 और 211 के तहत मुकदमा चलाने की अनुशंसा की गई थी।
जी हाँ, रवि कांत दुबे ना सिर्फ झुठे हैं, बल्कि झुठे मुकदमे करने में भी इन्हें महारत हासिल है, और यह बात हम नहीं, बिहार पुलिस कह रही है। रवि कांत दुबे के इतिहास को जब खंगालने की कोशिश की गई, तो ऐसे-ऐसे तथ्य सामने आये, जो किसी को भी शर्मसार करने को काफी हैं। एक बार उनके उत्पीडण से तंग आकर इनकी पत्नी ने रवि कांत दुबे पर मुकदमा दर्ज करवाया था, और उस समय इन्होंने भी अपने ससुराल वालों पर झुठा मुकदमा दर्ज करवा दिया। ठीक वैसे ही, जैसा कि इस बार इन्होंने भोजपुरिया डॉट कॉम के संचालक और कुछ अन्य लोगों पर दर्ज करवाया है। लेकिन उनके इस झुठ को ना सिर्फ पकडा गया, बल्कि बिहार पुलिस के एक अनुसंधान अधिकारी ने अपनी अनुसंधान रिपोर्ट (निचे देखें) में रवि कांत दुबे को झुठा बताते हुए उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कराने की अनुशंसा भी की थी।

हद तो तब हो गई जब इन्होंने अपने ससुर और साले को परेशान करने हेतु उनपर झूठा मुकदमा दर्ज कराया, और उस समय के पुलिस महानिरिक्षक (आई जी) ने बक्सर के आरक्षी अधीक्षक (एस पी) को लिखे पत्र में इनके खिलाफ जाँच कर कडी कार्यवाही करने का निर्देश दिया था। अपने पत्र (निचे देखें) में पुलिस महानिरिक्षक ने साफ-साफ लिखा है कि रवि कांत दुबे ने अपने ससुराल वालों के खिलाफ झुठा मुकदमा दर्ज करवाया था, और इनके शारीरिक उत्पीडन से तंग आकर इनकी पत्नी अपने मायके चली गई थी। दरभंगा प्रक्षेत्र के आईजी द्वारा हस्ताक्षरित इस पत्र में रवि कांत दुबे द्वारा कुछ बदमाशों के साथ आकर अपहरण की कोशिश से लेकर, भीषण अंजाम भुगतने की धमकी तक का जिक्र है।
इसके अलावा रवि कांत दुबे के चरित्र को इसी बात से समझा जा सकता है कि आईजी के उस पत्र में यह भी लिखा गया है कि इन्होंने अपने ससुराल वालों के परिवार को ना सिर्फ बर्बाद करने की धमकी दी, बल्कि उन्हें झुठे मुकदमे में फंसा कर जेल भेजवाने की बात भी कही। हद तो तब हो गई जब रवि कांत दुबे ने अपने बेटे सिद्धार्थ भारद्वाज (जो इनसे अलग अपनी माँ के साथ रह रहा था) का विधालय से नामांकन उस वक्त रद्द करा दिया, जब उसकी वार्षिक परीक्षा में कुछ ही दिन बाकी थे।


आज बिहार की जनता यह जानना चाह रही है कि आखिर किसकी पैरवी, अथवा किसके दबाव में सारी परंपराओं के धत्ता बताते हुए एक ऐसे व्यक्ति को एक गरिमामय पद पर बैठा दिया गया, जो ना तो कभी अच्छा बाप बन सका, नाही अच्छा बेटा, नाही वो अच्छा पति बन सका, और नाही अच्छा इंसान, तो फिर ऐसे व्यक्ति से भोजपुरिया समाज क्या उम्मीद रखेगा? आखिर सुशासन की इस सरकार में इस दुशासन के हाथों भोजपुरी अकादमी की बागडोर सौंपने की वजह क्या थी? चारों तरफ से घिर चुके रवि कांत दुबे पर अगर कार्यवाही नहीं होती है, तो फिर जिस तरह का माहौल आज बक्सर में दिख रहा है, उस से वह दिन दुर नहीं लगता, जब प्रदेश की जनता रवि कांत दुबे को हटाने के लिए अपनी ही सरकार के खिलाफ खडी हो जायेगी।




Hamra ta sharm aawata ki tahra jaisan paapi aadmi Bhojpuri Academy ke adhyaksh ban gail ba. Tahre jaisan logan ka wajah se Bhojpuri ke ee halat ba. tahra lajo naikhe lagat ka re?
A very shameful episode over internet. You should either come forward with evidance or step down and apologize for your malafide act.
जे अदिमी अपना पत्नी .............अउर अपना पढ़त लइका के संगे इतना अत्याचार करत होखे ओकरा खातिर का सजा हो सकत बा ............विचार के बात बा.
BAAKI HAMRA TA LAAG RAHAL BAA KAHE KI S**LE HUM TOHRE SE PADH KE RAAJNITI SHASHTRA
SE B.A. KAILE RANI HA. HUM TA MILITRY ME BAANI , MANN KARATA KI TORA KE G**I M*** DI.......