Home Samachar Bihar सिवान में बसंतोत्सव के धूम...

सिवान में बसंतोत्सव के धूम...

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रघुनाथपुर। "हम हईं भोजपुरिया, पुरबिया हईं..." भोजपुरिया समाज के अपना गौरवपुर्ण अतीत के वर्णन करत आ सुनहरा भविष्य के सपना देखावत भोजपुरी के प्रसिद्ध कवि डा. गोरख मस्ताना के ई गीत अपने आप में बसंतोत्सव के मकसद बताये खातिर काफी रहे। जय भोजपुरी परिवार के बसंतोत्सव के रंग कुछ अइसन जमल कि भोजपुरी त भोजपुरी, हिन्दी के प्रसिद्ध कवियित्री श्रीमती संध्या तिवारी भी हिन्दी भुला के भोजपुरिया रंग में रंगा गइली।

बुधवार के ई शाम सिवान के रघुनाथपुर के लोगन खातिर अपना गौरवशाली संस्कृति से परिचय के एगो नया अवसर बन के आइल। अवसर रहे जय भोजपुरी परिवार के बसंतोत्सव के, जवना कार्यक्रम के संयोजन स्थानीय लोक भागीदारी मिशन कइले रहे। सांझ के 6:30 बजे कार्यक्रम के उदघाटन जब स्थानीय गायक सागर कुमार, अउर सामाजिक कार्यकर्ता दिलीप कुमार मिल के कइल लोग, तब जय भोजपुरी परिवार के पुरान सिद्धांत याद आ गइल - हमनी खातिर हर भोजपुरिया समान बा, आ हर केहु विशिष्ठ बा।

दीप प्रज्ज्वलन के बाद सागर कुमार, जेकि एगो उभरत गायक हवन, एह मंच पर संकल्प लिहलन कि ऊ आजीवन अश्लीलता के विरोध करिहन, आ कबो कवनो अश्लील गाना ना गइहन। उनका संगे-संगे एह मंच पर, अउर मंच के सामने मौजुद सब लोग भोजपुरी से अश्लीलता के उखाड फेंके के संकल्प लिहल। एह संकल्प के दौरान ओहिजा मौजुद नवहा लोगन के देख के लागत रहे कि भोजपुरी में अश्लीलता के खिलाफ निर्णायक लडाई अब शुरु हो चुकल बाटे। ओही मंच पर मौजुद प्रसिद्ध शायर मंजर आलम के शब्दन में कहल जाव त "अपना माटी आ भाषा के प्रति जय भोजपुरी परिवार के ई समर्पण एक ना एक दिन जरुर इन्कलाब ले आई।"

एकरा बाद शुरु भइल कवि सम्मेलन, जेकर संचालन प्रसिद्ध साहित्यकार तंग इनायतपुरी कइलन। एकर शुरुआत में ही डा. सुभाष चन्द्र यादव के होली गीत सबके दिल के छू गइल, जवना में होली में अपना पति से दुर एगो विरहिन के दर्द के वर्णन रहे। ओकरा बाद बेतिया से आइल डा. गोरख मस्ताना के जादू सबका सिर चढ के बोलल। उहाँ के प्रसिद्ध गीत "हम हईं भोजपुरिया, पुरबिया हईं" में ओहिजा उपस्थित जन-समुदाय एक तरह से डूब गइल। एह गीत के चरम पर जवन कुछ पंक्ति आइल, ऊ हमनी का एहिजा दे तानी जा:

हमहीं मरद एक पानी के कहाइले
बांह काट गंगा जी के हमहीं चढाइले
हमहीं बाबु कुंवर सिंह के हईं तलवरिया, पुरबिया हईं
हम हईं भोजपुरिया, पुरबिया हईं

 
इनका बाद मंच पर अइली गाजीपुर से आइल श्रीमती संध्या तिवारी, जे वइसे त अपना हिन्दी कविता खातिर जानल जाली, लेकिन एह मंच पर, एह माहौल के बीच अपना आप के भोजपुरी-मय होखे से उहो ना रोक पवली। एह कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण रहनी देवरिया से आइल हास्य-कवि बादशाह तिवारी प्रेमी, जे अपना कविता के माध्यम से मौजुदा व्यवस्था पर चोट कइनी। राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख शायर श्री मंजर आलम एह कवि-सम्मेलन के अध्यक्षता कइलन, आ अपना संबोधन में उहाँ का भोजपुरिया समाज के राष्ट्रीय एकता में योगदान पर चर्चा भी कइनी।
 
जय भोजपुरी परिवार के भोजपुरिया स्वाभिमान सम्मेलन नियन एह कार्यक्रम में भी महिला लोगन के काफी उपस्थिति रहे, जवन भोजपुरिया समाज के सुखद भविष्य का ओर इशारा करत रहे। रात के करीब बारह बजे जब ई कार्यक्रम खत्म भइल, तब रघुनाथपुर के नवहा लोगन का लगे अश्लीलता आ फूहडपन से इतर होली के एगो नया परिभाषा, अपना माई भाषा खातिर कुछ करे के एगो जुनून रहे, आ एकर परिणाम दुरगामी होई, ई त तय बाटे।

एह कार्यक्रम के सफल बनाये में जय भोजपुरी परिवार के श्री संजय कुमार सिंह, श्री नवीन सिंह परमार, श्री प्रमोद कुमार ठाकुर, श्री लक्ष्मीकांत सोनी, अउर पंजवार (सिवान) स्थित नवचेतना समिति के सदस्यन के विशेष योगदान रहे।

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Comments (1)
hi
1 Wednesday, 23 March 2011 11:01
ajit
ye hamara gao ke baat ba