नई दिल्ली। भारतीय ज्ञानपीठ, दिल्ली द्वारा साहित्य के क्षेत्र में युवा लेखकन के हर वर्ष दिहल जाये वाला प्रतिष्ठित पुरस्कार युवा ज्ञानपीठ पुरस्कार अबकी बार हिन्दी के चर्चित कवि और कथाकार विमलेश त्रिपाठी के प्रदान करे के घोषणा कईल गईल बाटे। बहुमुखी प्रतिभा के धनी विमलेश त्रिपाठी साहित्य के नामी युवा लेखक भइला का संगे-संगे भोजपुरी से भी बहुत महत्वपूर्ण रूप से जुड़ल बानी अउर भोजपुरी लोकगीत में खास रूचि के कारण उनकर भोजपुरी के दू गो एल्बम भी रिलीज हो चुकल बाटे।भारतीय ज्ञानपीठ के इ पुरस्कार कवनो लेखक के कवनो विधा के पहिलकी किताब पर दिहल जाला। एह बार पुरस्कार समिति में डॉ. नामवर सिंह, कथाकार अखिलेश, डॉ. गंगा प्रसाद विमल, जितेन्द्र श्रीवास्तव सहित भारतीय ज्ञानपीठ के निदेशक रविन्द्र कालिया अउर भारतीय ज्ञानपीठ के न्यासी आलोक जैन शामिल रहलन। 7 जून के डॉ. नामवर सिंह के अध्यक्षता में भईल बैठक में सर्वसम्मति से श्री विमलेश त्रिपाठी के भारतीय ज्ञानपीठ के युवा पुरस्कार उनकर कहानी संग्रह अधूरे अंत की शुरूआत पर देवे के निर्णय लिहल गईल।
7 अप्रैल 1977 में बक्सर जिला (बिहार) के हरनाथपुर गांव में जन्मल विमलेश जी प्रेसिडेंसी कॉलेज आ कलकत्ता विश्वविधालय से हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर के उपाधि अर्जित कइनी अउर केदारनाथ सिंह के कविता में लोक संस्कृति आ आधुनिकता विषय पर पी.एच.डी कई रहल बानी। कहानी के साथे विमलेश जी कविता के क्षेत्र में भी सक्रिय बानी। कविता आ कहानी के माध्यम से विमलेश जी पिछला कुछ वर्ष से लागातार चर्चा में बानी। बहुत जल्दी उनकर कविता संग्रह “हम बचे रहेंगे” छप के आ रहल बा। विमलेश जी के कविता कहानी में भोजपुरी संस्कृति आ माटी से जुड़ाव साफ महसूस कई जा सकेला।
उनका कविता संग्रह पर वरिष्ठ कवि केदार जी के कहनाम बा –“इन कविताओं के एक अन्य चरित्र लक्षण ने भी ध्यान आकृष्ट किया। वह है इनकी गहरी स्थानीयता – किसी आंचलिक अर्थ में नहीं – बल्कि अच्छी कविता के सहज गुण धर्म के रूप में स्थानीयता। यों तो यह बात पूरे संग्रह में देखी जा सकती है। पर मेरे जैसे पाठक ने उसे सबसे पहले लक्ष्य किया इस कवि के भाषिक व्यवहार में। भोजपुरिया क्षेत्र से आने वाले इस कवि के भाषा-शिल्प में मुझे अनेक ऐसे शब्द मिले जिनसे लम्बे समय बाद मेरी भेंट हुई। ‘पाम्ही’ और ‘अनगराहित भाई’ ऐसे ही प्रयोग हैं। भाषा के स्तर पर जिस बात ने मुझे गहरी आश्वस्ति दी वह है कवि का वह विवेक जिसके चलते वह भोजपुरी शब्दों को कविता के पूरे प्रवाह में इस तरह घुलमिल जाने देता है कि वे सहज लगते हैं और सुग्राह्य भी।“
भोजपुरिया डॉट कॉम परिवार एह अवसर पर विमलेश त्रिपाठी के शुभकामना देता, अउर उम्मेद करता कि एही लेखां उहाँ का सफलता के सीढी चढत जाएब।



नेह के साथे
प्रमोद
yuva gyanpeeth khatir badhayi....jarure ee hamni khatir gumaan ke baat ba...ishwar khub yashashwi banawas raura ke...shubhkamna..