Home Sahitya Aalekh देश रोवता लेकिन सरकार के का... ?

देश रोवता लेकिन सरकार के का... ?

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आज देश पर अब तक भइल सबसे बडहन आतंकी हमला के बरसी हवे, अउर एक पल खातिर हर भारतवासी ओह हर व्यक्ति के श्रद्धांजलि देता, जे एह हमला में मारल गइल। मेजर उन्नीकृष्णन अउर हवलदार गजेन्द्र सिंह समेत हेमंत करकरे, तुकाराम ओंबले अउर हर सुरक्षाकर्मी के शहादत पर हर केहु के गर्व बा, लेकिन लोगन के मन में कहीं ना कहीं एगो गुस्सा भी बा कि आखिर कसाब के फांसी कब होई।

आज सबेरे अखबार में पढनी ह कि कुछ अमेरीकी लोग चाहता कि कसाब के फांसी ना होखो, बल्कि ओकरा के सुधारे के कोशिश कइल जाव। लोग मानवाधिकार के दुहाई देता, लेकिन शायद एह लोगन के नइखे पता कि मानवाधिकार "मानव" खातिर होला, सैकडन लोगन के जान लेवे वाला "दानव" खातिर ना। ओह से बढहन आश्चर्य के बात ई बा कि ई लोग ओह अमेरिका के नागरिक हवे, जवन अपना ऊपर भइल एगो आतंकी हमला (9/11) के विरोध में अफगानिस्तान नियन देश के साफ उजाड देले रहे, आ ओह समय केहु ओकर विरोध ना कइल। अगर कसाब के छोड दिहल गइल त का गारंटी बा कि ऊ सुधर जाई? अगर एकरा के आजाद छोडे के ही रहे त फेर एकरा गिरफ्तारी खातिर तुकाराम ओंबले नियन बहादुर पुलिसवाला आपन जान काहें देहलन? ओही समय छोड दिहल जाइत आजाद, कि लवट जा पाकिस्तान आ फेर अइह 10 गो लोगन के लेके, दू-चार सौ लोगन के जान लेवे खातिर।

वइसे लोगन के गुस्सा एह बात पर भी बा कि देश के भावना के सरकार काहें नइखे समझत। कसाब पर त खैर अभी मुकदमा चलते बा, लेकिन लोग इहो जानल चाहता कि आखिर पिछला 2004 से आतंकवादी अफजल गुरु (संसद पर हमला के अपराधी) के काहें बइठा के सालों-साल खियावल जाता? अगर ई खाली मुस्लिम वोट बैंक खातिर कइल जाता, त फेर काल्ह के बिहार चुनाव के परिणाम पर तनी ध्यान देवे के जरुरत बा। बिहार में मुस्लिम मतदाता अच्छा-खासा तादात में बाडे, अउर उनका सहयोग के बिना तथाकथित "साम्प्रदायिक" कहाये वाली भाजपा अउर ओकर सहयोगी जद-यू मिल के 85 फीसदी सीट त नाहिये जीत पाइत लोग। कहे के मतलब ई बा कि अब मतदाता लोग एतना बेवकुफ नइखे कि कसाब अउर अफजल गुरु के नांव पर रउआ के वोट दी, अब वोट विकास के मुद्दा पर दिहल जा रहल बाटे, एह बात के सरकार जेतना जल्दी समझ जाव, बढिया रही।

अरुंधति राय नियन लोग अभिव्यक्ति के स्वतंत्रता के नांव पर एह देश के 2 टूकडा कइल चाहता, ऊ लोग माओवादियन के आ देश के गद्दारन के "देशभक्त" बतावता, आ देश के सरकार उनका खिलाफ कवनो कारवाई त दूर, एगो बयान देवे के कोशिश नइखे करत। अगर माओवादी लोग देशभक्त बा, त का ऊ पुलिसवाला अउर आम लोग देशद्रोही बाटे, जेकर ई लोग हत्या कइ रहल बाटे? का एह देश में सरकार के काम सिर्फ बइठ के तमाशा देखल रह गइल बाटे? का एही तरह चली ई देश...? अगर आतंकवादियन अउर देशद्रोहियन के खिलाफ कारवाई ना होई, त का ओह लोगन के मन ना बढी?
 
एह देश के जनता जानल चाह तिया कि का एह देश पर हमला करे वाला के सुरक्षा में आखिर करोडों रुपया के खर्च कब तक बर्दास्त करी ई देश? हमरा त इहे नइखे बुझात कि आखिर एगो आतंकवादी के बचा के सरकार देश आ दुनिया के सामने का साबित कइल चाह तिया? का एह से कहीं ना कहीं ई मैसेज नइखे जात कि एहिजा आतंकवादी बनला में कवनो रिस्क नइखे? का एकरा वजह से आतंकवाद के अउर बढावा ना मिली? अगर हमनी के नेता लोग अफजल गुरु के सजा नइखे दिहल चाहत, त का ओह लोगन के हक बा हर साल संसद पर हमला के बरसी के समय (13 दिसम्बर) ओहिजा शोक-सभा करे के? मुंबई हमला के एह बरसी पर सवाल त बहुत सारा बा, लेकिन नाही एको जबाब लउकता, नाही जबाब देवे वाला।