"पंद्रह बरिस ले लालू जवन कइले तवन त लोग भोगबे कइल, अब नीतीशो के काम आंखि के सोझा बा-मिला लीं। लोग बुझिए रहल बा कि ओह पंद्रह बरिस आ एह पांच बरिस में केतना अंतर बा। हम त कहेम कि अगिलो बेरी नीतीशे पावर में आवस जेसे कि ‘बिहार' के नाम पर लागल दाग मेट जाव। आ दुनिया जान जाव कि एक समय भारत के गौरव कहाए वाला बिहार में आजुओ केतना दम बा।"
उपरोक्त कहनाम नेतवन जइसन कवनो बनावटी बयान ना ह, इ उद्गार ह बिहार में बदलाव के बयार महसूस क रहल हर उ बिहारवासी के, जे पांच बरिस पहिले लालू-राबड़ी के राज से अगुता के नीतीश कुमार के बिहार के बागडोर थमवले रहे। बिना लाग-लपेट के माने के पड़ी कि पिछला पांच बरिस से बिहार के सूरत आ सिरत में काफी बदलाव हो रहल बा। बात शहर के करीं या गांव के हर ओरी विकास के किरिण फूट रहल बिया। बात अपने मुंह मियां मिट्ठू बने के नइखे, सात समंदर पार अमरीका तक बिहार के यशगान हो रहल बा। विकास के पैमाना पर हरमेशा नीचे से नंबर वन रहे वाला प्रदेश बिहार अब ऊपर से नंबर वन बन गइल बा।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सक्षम नेतृत्व के नतीजा ह कि बिहार अपना ‘दमकत गौरव' का ओरी लउट रहल बा। हालांकि मंजिल अभी बहुत दूर बा, बाकिर पांच बरिस के सफर में जनता के ई विश्वास हो गइल बा कि बिहार के माथा पर लागल करिया दाग धीरे-धीरे मेट रहल बा। लालू-राबड़ी राज में बिहार के सड़कन के बारे में एक जुमला खूब चलल रहे- ‘सड़क में गड़हा कि गड़हा में सड़क'। बिहार के गांव-गांव में सड़क के दशा सुधर रहल बा। गांव से शहर के दूरी कम हो रहल बा। सड़क के रास्ते ग्रामीण जीवन में बदलाव दिखाई दे रहल बा। जहां ले सामाजिक सरोकार के बात बा, पहिले के तुलना में स्कूलन में विर्द्याथिअन के संख्या बढ़ल बा। ग्रामीण क्षेत्रन में लड़की घर से बाहर निकल स्कूल जात बाड़ीसन। साइकिल चला रहल बाड़ीसन। इहे हाल शहरन में भी दिखाई देता। युवतीअन में आत्मविश्वास बढ़ल बा, जवन कानून-बेवस्था में सुधार के उदाहरण कहा सकेला।
एगो टाइम रहे कि सांझ होखत-होखत हमनी के आपना काउंटर पर माच्छी मारे के पड़त रहे। अब त देर रात ले गाहकन से फुरसत ना मिलेला।" (पटना के एगो रेस्टोरेंट मालिक) उपरोक्त उद्गार अपराध पर नियंत्रण के नीतीश सरकार के इच्छा शक्ति कहा सकेला। पिछला साल एगो अंग्रेजी अखबार में बिहार के एगो वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के कहनाम रहे, "पिछलकी सरकार में भ्रष्टाचार, अपहरण और अपराधियन के गठजोड़ से जवन जंगल राज कायम भइल रहे, अब उ खत्म होखे के कगार पर बा।"
सकरा प्रखंड, गांव-मुरियारी, जिला-मुजफ्फरपुर निवासी इंद्रभूषण सिंह उर्फ 'अशोक' के कहनाम बा कि नीतीश के काम-काज के लालू राज से तुलना कइले बेकार बा। काहे से कि काम से काम के तुलना होला। लालू राज में त कवनो कामे ना भइल रहे त नीतीश राज से तुलना के कवनो सवाल नइखे। गांवन में जवन अंजोरिया अब भइल बा ऊ पहिले कहां रहे। पंचायत के हालत सुधर रहल बा, लोग के काम मिल रहल बा। अभियो लोग कमाए खातिर परदेश जा रहल बा, बाकिर उ नउबत नइखे कि आपना घरे रहला पर लोग भूखे मरो। हम त इहे कहेम कि भगवान बिहार के तकदीर संवारे के एगो मउका देहले बाड़न, अबकी लोग चूकल त फेर बिहार के बचावे केहू आगे ना आई। सरकार केहू ना केहू के त बनबे करी बाकिर बिहार आ बिहारीअन के दशा आ दिशा केहू ना ठीक कर पाई।
शिक्षा कर्म से जुड़ल बसडीला, गोपालगंज के शहनवाज अहमद से जब पूछल गइल कि मुसलमान बिरादरी के का हाल बा, काहे से कि लालू प्रसाद यादव आ रामविलास पासवान आरोप लगा रहल बाड़ेन कि नीतीश सरकार अल्पसंख्यकन के विकास खातिर कुछु नइखे कइले, तब उहां के कहनी कि जे सत्ता से बाहर रही ऊ त चिंचिंअइबे करी। अपने जमाना में भला ऊ लोग का कइले रहे। सबसे बड़ बात कि जहां विकास के बात होता उहां मुसलमान-हिंदू के का मतलब। बिहार में रहे वाला हर केहू बिहारी ह। मुसलमानन के इतने चिंता बा त उ लोग अपने शासन में का कइले रहे पहिले जांच लेव। हं बात मुसलमान के चलल बा त एइमें कवनो संदेह नइखे कि नीतीश सरकार में विकास के अवसर सबका मिल रहल बा आ एहसे मुसलमान अलग नइखन।
पंजाब, दिल्ली, गुवाहाटी आदि शहरन में कमाए गइल कुछ युवकन से बिहार के वर्तमान स्थिति के बारे पूछला पर ओह लोगन के जवाब रहे कि बिहार के बारे अब जवन कहा-सुना रहल बा ओहसे हमनी के आपना बिहारी भइला पर गर्व होता। गुवाहाटी में एगो संचार कंपनी में कार्यरत बिहारी युवा दीपनारायण महतो के कहनाम रहे कि बिहार में अइसने रफ्तार रहल त एह प्रदेश के आगे बढ़े में अऊर देर ना लागी। पढ़ल-लिखल लइकन के अब बउआए के नइखे पड़त। शिक्षा में जवन प्रगति अबकी भइल बा, उ एक समय बिहार के खातिर सपने रहे। बाकिर जरूरी बा कि अगिला चुनाव में बिहार के जनता कवनो कवनो जातिगत मोह में मत पड़ जाव। बिहार में जातिगत समीकरण चुनाव के समय बहुत बड़ ‘फैक्टर' होला, बाकिर लोगन से बात कइला पर पता चलल कि ‘बड़ जतिया, छोट जतिया' वाला सोच से लोग ऊपर उठ रहल बा। गोपालगंज सत्र न्यायालय में एगो वकील के सहायक ताइद कुबेर माझी के कहनाम रहे, "जात-पात से रोटी मिली? जाति के नाम पर लोग के भरमावल अब नइखे चलेवाला।"
बक्सर, सिवान, छपरा, भागलपुर, कटिहार, सीतामढ़ी के शहरी आ ग्रामीण क्षेत्र के खेतिहर, नौकरीहर, व्यापारी वर्ग से बात कइला पर एहे विचार सामने आइल कि जे भी होखो नेतवन के बहकवला में नइखे पड़े के। उन्नति आ मान-सम्मान खातिर जरूरी बा कि नीतीश कुमार के फेर मुख्यमंत्री बनावल जाव। बिहार में नीतीश सरकार के सफल नेतृत्व के नतीजा ह कि नामी-गिरामी कंपनी एह प्रदेश में निवेश करे के तैयार बाड़ीसन। देश के सबसे बड़हन पेट्रोलियम कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसी) बिहार में ६०२ करोड़ रुपिया के निवेश करे के फैसला कइले बिया। कंपनी के बिहार में कारोबार के विस्तार के योजना बाटे, जेकरा तहत कइगो योजना पर काम चल रहल बाटे अउर कइगो नया योजना शुरू करे के प्रस्ताव बाटे। एह सब योजना के जरिए कंपनी अगिला तीन साल में बिहार में ६०२ करोड़ रुपिया के निवेश करी। कंपनी मुजफ्फरपुर में चालू वित्तीय वर्ष में ४४ हजार मीट्रिक टन क्षमता वाली एलपीजी (रसोई गैस) बॉटलिंग प्लांट लगाई, जेकरा से पूरा राज्य में रसोई गैस के मांग के पूरा कइल जाई। बिहार में पेट्रोल और डीजल के बढ़त मांग के अनुसार मोतिहारी (नेपाल-अमलेखगंज डिपो) तथा बैतलपुर डिपो (उत्तर प्रदेश) के बीच में नया पाइप लाइन बिछावल जाई।
आंकड़ा में बिहार के देखल जाव : बिहार जीडीपी के मामला में देश के नंबर वन राज्य बन गइल बा। बिहार के विकास दर गुजरात के विकास दर से भी बेसी हो गइल बाटे। आंकड़ा के अनुसार बिहार के जीडीपी दर ११.३ प्रतिशत से बढ़के १२.६ प्रतिशत हो गइल बाटे, जबकि देश के सबसे ज्यादा जीडीपी वाला राज्य गुजरात के विकास दर ११.०५ बा।
सात समंदर पार बिहार : बिहार के बदलाव के गूंज पर अमरीका के प्रतिष्ठित अखबार न्यूयार्क टाइम्स में प्रकाशित एगो आलेख भी मुहर लगवले बाटे। पिछला १० अप्रैल के एह अखबार में प्रकाशित एल. पोलग्रीन के आलेख ‘बिहार अब देश के एगो माडल राज्य बनी' में बदलत बिहार के तस्वीर पेश कइल गइल बाटे। एह आलेख में राज्य के विकास दर का संगे-संगे गांव तक में परिवर्तन के संकेत के जिक्र कइल गइल बाटे। आलेख में बतावल गइल बा कि कइसे ओह बिहार में कानून के राज स्थापित भइल, जहवां पहिले जंगलराज रहे। अपहरण एगो उद्योग के रूप ले लेले रहे, आ जातिगत उन्माद का संगे-संगे हिन्दू-मुस्लिम संघर्ष भी रोजमर्रा के बात रहे। अपराधियन के पुलिस के संरक्षण प्राप्त रहे। किसान बाढ़-सुखाड़ से त्रस्त रहलन। अइसन हालात में आर्थिक विकास के बात भी बेमानी रहे। एही कुल्ह कारण से बिहार में जंगल राज के बात कहल जात रहे। बाकिर उहे बिहार अब बदल गइल बा, अउर ११ प्रतिशत के औसत विकास दर हासिल कइ के ई देश के दूसरा सबसे तेज विकास दर हासिल करे वाला राज्य बन चुकल बाटे।
एह आलेख में कहल गइल बा कि यदि बिहार बदल सकेला, त भारत के कवनो हिस्सा में परिर्वतन संभव बा। बेहतर नीति, सुदृढ़ प्रशासन आउर बेहतर कानून बेवस्था से कुछ भी संभव बाटे। एहिजा एह बात के रेखांकित कइल गइल बा कि नीतीश कुमार के सत्ता में अइला के बाद सबसे पहिले पुलिस महकमा में एह बात के संकेत दिहल गइल कि कानून के राज स्थापित कइल सरकार के प्राथमिकता हवे। संगठित अपराध आ अपराध के प्राप्त राजनीतिक संरक्षण के पर कतर दिहल गइल। वइसन कइगो राजनीतिज्ञन के जेल के हवा खाए के पड़ल आउर उनुकर स्पीडी ट्रायल भइल, जिनकर अपराध में संलिप्तता रहे। एह में से कइगो सांसद अउर विधायक भी रहलन।
आलेख में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के एगो साक्षात्कार के हवाले से कहल गइल बा कि बिहार में सरकार आउर प्रशासन नाम के कवनो चीज ना रहे। जब नीतीश कुमार सत्ता संभरलन तब सरकारी दफ्तरन में धूल से सनल फाइल आ रेमिंग्टन टाइपराइटर के कार्य संस्कृति रहे। बाकिर अब ई सब कुछ बदल गइल बाटे। अपराध पर नियंत्रण के बाद सबसे बेसी जोर स्कूल आउर अस्पतालन के संचालन के ठीक करे पर रहल। पहिले २५ लाख बच्चा स्कूल के पहुंच से दूर रहले सन, जवन संख्या अब घट के ८ लाख से भी कम हो गइल बाटे। एह आलेख में एह बात पर भी आश्चर्य व्यक्त कइल गइल बा कि जवना भूमि पर बुद्ध के ज्ञान मिलल रहे, आउर जवना माटी के वैभव दक्षिण एशिया के देशन में सबसे मजबूत सल्तनत के रहल, आखिर ओकर एतना अवनति कइसे हो गइल?
एह आलेख में भोजपुर के पवना गांव के उदाहरण दिहल गइल बाटे। ई कहल गइल बा कि परिवर्तन आउर ओकर सीमा एह गांव में साफ दिखाई दे रहल बाटे। जवन गांव तक आरा से पहुंचे में पहिले २ घंटा के समय लागत रहे, ओहिजे अब बढ़िया सड़क के कारण लोग आधा घंटे में पहुंच जाला। गांव के गलियन में सौर ऊर्जा के दुधिया रोशनी बिखरल बाटे, आउर गांव के बाजार अब सूर्यास्त होते साथ बंद नइखे होत।
कुल मिला के कहल जा सकेला कि पहिले न्यूजवीक आ ओकरा बाद अब न्यूयार्क टाइम्स में छपल ई आलेख राज्य सरकार के सफलता के कहानी पर मुहर लगा रहल बाटे। एगो पिछड़ल मानल जाए वाला राज्य में एह बदलाव के खास मायने बा।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार आ पूर्वोत्तर भारत के सबसे बडहन हिन्दी अखबार "दैनिक पूर्वोदय" के उप-समाचार संपादक बानी।)




राउर एक एक बात से हम सहमत बानी आ सांच पुछी त एगो उमेद बन्हा गईल बा नितिश कुमार से । एगो अईसन उमेद जवना मे बिहार खातिर आगे के राहि एक दम चक्चक लउकत बिया ।
धन्यवाद बा एह विस्तृत आ आंकडा से भरपुर लेख लिखे खातिर ।
जय भोजपुरी
Apka Lekh BADLAT BIHAR, SAWRAT BIHARI TIKDAR bahut acha lega jo app ne isme bate likha o bikul sahi hai or oh hame bhi mahsush hota hai
Mujhe Pura Vishwas hai Nites Kumar Ji ka Dubra Sakar Benega phale hum gaon jate dar legta thi ki koi mere saman chin na le ya hme kuch kar de or sarak ka kaya bat karna Ghade hi Road Tha
ab to kabhi kisi time ghar Ja Sake hai or mera Gaon ka Road Chandigarh ki road jaisa hi ho Gaya hai
Thanks Sampadak Ji Jo App ne Itna Acha Lekh Likha hai
your's
Kundan Kumar Verma