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महात्म्य "खोईंछा" के

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(लेखिका परिचय: मूलत: बलिया जिला के निवासी श्रीमती सरोज सिंह जी फिलहाल जयपुर में रह रहल बानी। भोजपुरी संस्कृति अउर खान-पान पर खास पकड इहां के बाकी लोगन से अलग बनायेला, अउर माटी से दूर रहला के बावजुद अपना संस्कारन पर गर्व कइला के कारण इहां का फेसबुक, जय भोजपुरी डॉट कॉम अउर रसोइया डॉट कॉम नियन वेबसाइटन पर खासा चर्चित बानी।)
 
"विदाई के बेर
माई देले अचरा में
मुट्ठी  भर चाउर
पाँच गोटा हरदी
दूब आउर सिक्का
कहे के थोर होला
बाक़ी एमे भरल बा
नेह छोह दुलार
अखंड सौभाग्यवती और
सुखमय जीवन के
आसिरबाद  अपरम्पार
 
खोइंछा भा खोछा आपन भोजपुरी संस्कृति में बहुत प्रचलित शब्द हवे बाकी एकर शाब्दिक अर्थ तो हमरो नइखे पता पर काहे कब और कइसे दिहल जाला ई पता बा... लइकी के बियाह भइला के बाद विदाई के समय भा बेटी जब नइहर से ससुरा अउर ससुरा से नइहर जाले तब माई/ सास/ ननद/ भौजाई अंचरा में खोईंछा भर के विदा करेले...।
 
खोईंछा भरे के भी जगह जगह कुछ अंतर बा कई जगह हरदी से रंगल छाऊर  और गुड़ से भरल जाला कई जगह जीरा और पाँच गो खड़ा हरदी और सिक्का से / कई जगह चाउर हरदी और दूब और सिक्का डाल के भरल  जाला ....मगर खोइंछा भरे के महात्म्य सबके एके बा... कि यात्रा विघ्न रहित होखो बेटी भा पतोह अखंड सौभाग्यवती और जीवन सुख समृधि से परिपूर्ण होखो।
 
खोइंचा हमेशा आँचर में सूप से दिहल जाला... ऊ बात अलग बा की आधुनिक जमाना में मेहरारू लोग अंचार ख़राब ना होखो एसे बाद में रुमाल में डाल लेला लोग... एमे प्रयुक्त होखे वाला सूप और आँचर  एकर भी खास महत्व बा।
 
सूप - आपन भोजपुरी समाज में सूप के खासा महत्व बा इ सभे जानत बा साथ साथ एकर एगो खास गुण भी बा "सार सार को गहि रहे थोथा देय उडाय "माने इ खाली शुद्ध चीज के ग्रहण करेला एसे सूप के शुभ मानल जाला।

आँचर - मेहरारू लोग के अंचार बहुत महत्वपूर्ण होला ...एक तरह से समझल जाऊ ता एगो मेहरारू के संसार होला...सुख दुःख के साझेदार होला लइकन के छाव देवे वाला आपन गरिमा के ढाके वाला... एहिसे खोइंछा आँचर में भरल जाला में दियाला ताकि ऊ आशीर्वाद हमेशा साथ रहो।

खोईंछा में भरे वाला सामग्री और ओकर महात्म्य...

चाउर - चाउर (अक्षत) माने कबो ना टूटे वाला। सफ़ेद रंग शुभ के प्रतीक बा एहिसे चाउर के शुभ और धान धन्य से पूर्ण मानल जाला और खोईंछा में भरे के माने ऊ जहाँ भी जाये ओकर जीवन धंधे से पूर्ण रहो।

हरदी - हिंदू धर्म-शास्त्र में अईसन कवनो मांगलिक कार्य नइखे जेमे हरदी के प्रयोग ना होत होई... एके शुभ निरोगी और पवित्र मानल जाला... खोइंछा में डाले के माने ओकर जीवन निरोगी रहो।

दूब - दूब के भी आपन शास्त्र में बहुत  बखान मिलेला और शुभ भी मानल जाला। एकर एगो ख़ास गुण होला. दूब के पौधा एक बार जहाँ जम जाला, ओहिजा से नष्ट कईल बड़ा मुश्किल होला देखे में भले छोट होला बाकि एकर जरि बहुत गहरा ले पनपेला...। खोइंछा में भरे के माने ओकर जीवन विघ्न्राहित  अक्षुण्ण रहो दूब जइसन।

गुड़ - गुड़ के प्रधान गुण मिठास होला एही तरह खोइंछा लेबे वाळी के जीवन में मिठास रहो...। एहिसे  कहीं-कहीं गुड़ भी खोइंछा में दिहल जाला...।

जीरा - कई जगह जीरा हरदी से भी खोइंछा भराला जीरा के खोइंछा के सन्दर्भ में का महत्व बा इ ता हमरो नइखे पता...।
 
सिक्का भा रूपया - सिक्का धन के परिचायक हवे ताकि ओकर जीवन में धन के कभी कमी ना होखो ओकर आँचर (संसार) समृधि पूर्ण होखो।
 
दुर्गा पूजा में इ मानल जाला कि देवी जी हर बरस आपन नइहर आवली एहिसे अष्टमी और नवमी में मेहरारू लोग देवी जी के खोइंछा भर के विदा करेला लोग...। कईगो देवी गीत में भी खोइंछा के वर्णन मिलेला..... जइसे,
 
मांग सिन्दुर से भरी,
मुख पान से भरी,
खोइछा धान से भरी,
मैया हे देहू ना अशीष घरवा जाऊं मैं चली।
  
 
Comments (7)
खोइछा के जानकारी
1 Monday, 16 January 2012 15:55
shiv shambhu sharma
खोइछा के जानकारी से मन मे खुशी भईल ।आभार आपके ।
पुरान बाकीर नया जानकारी
2 Monday, 16 January 2012 20:33
संजीव सिंह
आदमी ऐतना त जानत रहल हवे कि विदाई के बेर घर वाला लो अफना बेटी-बहु के आँचर मे खोंईछा मे चाउर, हरदी, मिठा आदी के संगे लोर के दु-चार गो बुँद भेँट कर के राह मे आवे वाला हर विप्तती से बचावे के एगो आभासीक प्रयास करे ला लोग। बाकीर ऐह खोईंछा के असली महत्तव अउर कारण आज ऐह लेख के पढला प मालूम भईल हवे।

एगो असाधारण अउर अपेक्षाकृत पुरान बाकीर नया जानकारी से रूबरू करावे खतीरा रवुआ के हम धन्यावाद देत बानी। अउर उम्मीद करत बानी कि अईसन-अईसन ढेर जानकारी, जवना के हमनी जान के भी अनजान बानी सन, से भेँट करावत रहेम।

धन्यावाद!
mahatm khoichha ke
3 Sunday, 22 January 2012 15:45
ratan pathak
hamke bahut khushi ba ki aaj badlat yuh me bhi aapn sanskar jas ke tas ba

jai bihar
jai bhojpuri samaz
barra nik lagal
4 Wednesday, 15 February 2012 18:22
raju suman
i jankari barra aachha lagal
खोंईछा के शाब्दिक अर्थ
5 Monday, 27 February 2012 15:06
Rajnandan
खोंईछा के शाब्दिक अर्थ होखेला " अँचरा भा आँचल मगर प्रचलित अर्थ में " खोंईछा" शब्द के मतलब विवाहित स्त्री के ( कुंवारि कन्या के खोंईछा देवे के प्रचलन नइखे) विदाई स्वरुप दिहल जाय वाला धन-धान्य से हीं लगावल जाला।जेकर भावार्थ होई धन-धान्य से भरल-पुरल अँचरा।

खोईंछा देवे के शुरुआती प्रचलन के जहाँ तक अनुमान बा स्त्री के यात्रा निर्बाध संपन्न होखे आ रास्ता में कवनो बुरी शक्ति भा बुरी नजर ( डायन-जोगिन के नजर) से बचाव के उद्देश्य से शुरु भइल होई। काहेकि खोंईछा सामग्री वास्तव में शुभ मानल जाये वाला पूजा सामग्री रहेला आ एह सामग्री के उपयोग ओह परिवार में भा ओह स्त्री द्वारा ना कइल जाला जेकरा के खोंईछा मिलेला। कुछ समाज में खोंईछा के चाउर या त‍ बेटी भा सिर्फ ननद द्वारा हीं खीर या खिचड़ी बनाके खाये के परंपरा बा।
khoinchha ke bare me jankari
6 Monday, 05 March 2012 15:25
raj kumar prasad
khoichha ke bare raura jankari jan ke man ta bada khush bhail lekin i jaan ke bada achraj bhail ki khoichha ke bare me rauro jankari adhura ba i raura sabd sun ke bada achraj bhail................
khoichha me Jeera ke mahatav
7 Wednesday, 21 March 2012 16:55
Mrs. Sheela Choubey
khoinchha me jeera ke mahatam ba kiJaise jeera me khushbu hola waise hi jingi me bhi prem ,khushi aur smmirdhi raho