Home Cinema Special हंगामा है क्यों बरपा... ?

हंगामा है क्यों बरपा... ?

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अभी दू दिन पहिले हमनी का स्व. सुधाकर पाण्डेय के शोक सभा से संबंधित एगो सच्चाई के खुलासा का कइनी जा कि पूरा फिल्म इंडस्ट्री में जइसे आग लाग गइल। पहिलहीं से कई टूकडा में बँटल भोजपुरी इंडस्ट्री खातिर इ मुद्दा शायद विवाद के एगो आउर वजह बन गइल।


पिछला 2 दिन में हमनी का लगे सैकडन गो फोन आइल, ओह में कुछ लोग हमनी के विरोध कइल, लेकिन ज्यादातर लोग (75% से अधिक) हमनी के पक्ष में ही रहल ह। कुछ लोग त एहिजा ले कहल कि सुधाकर पाण्डेय जइसन सम्मानित व्यक्ति के नाम पर केहू के राजनीति करे के इजाजत ना होखे के चाहीं। आ कई लोग एह घृणित घटनाक्रम के निन्दा भी कइल।

दिनेशलाल यादव निरहुआ
आज हमनी का लगे दिनेशलाल यादव निरहुआ के फोन आइल ह, जवना में ऊ मनोज टाइगर द्वारा दिहल गलत- बयानी से खुद के दूर क लिहले। "हमरा नइखे पता कि मनोज टाइगर इ कवना आधार पर कहलन, आ उनकर दिहल बयान खातिर हम कवनो तरह से जिम्मेदार नइखी। हम त सुधाकर जी के निधन के खबर सुनते साथ हैदराबाद से शूटिंग छोड के उनुका घरे गइनी, आ शूटिंग के मजबूरी के वजह से ओही दिने हमरा वापस लवटे के पडल। एतना जल्दी आयोजित शोक सभा में हमार पहुँचल संभव ना रहे, एह से हम अपना भाई के ओहिजा भेजले रहनी," दिनेशलाल यादव भोजपुरिया डॉट कॉम के कहलन। दिनेश जी के मजबूरी हमनी का समझ सकेनी जा, काहें कि एगो व्यस्त कलाकार अगर शूटिंग छोड के 3-4 दिन खातिर कहीं चल जाव त, ओह फिल्म के आ ओकरा से जुडल बाकी कलाकारन के काफी असुविधा हो जाई। वइसे भी दिनेश जी खुद एक दिन खातिर सुल्तानपुर गइनी, आ तेरही के दिन उनकर भाई प्रवेशलाल यादव ओहिजा उपस्थित रहलन।

श्याम बहादुर सिंह
एह आलेख में श्याम बहादुर सिंह के नाम खाली "रंग दे बसंती चोला" के संदर्भ के दौरान प्रयोग भइल रहे, ना कि कवनो दुर्भावनापूर्ण वजह से। लेकिन कुछ लोग एकर गलत मतलब निकाल लिहल, जबकि उहाँ का एगो सम्मानित शख्सियत बानी।

आलोक कुमार
शुरुआत में त फोन द्वारा संपर्क क के ओह शोक सभा के आयोजक आलोक कुमार जी काफी रोषपूर्ण अंदाज में एह खबर के तथ्यहीन आ बकवास करार देहलन। ओकरा बाद उनुकर पी. आर. ओ. द्वारा ई खंडन के आइल बा, जवन कि हमनी का जस के तस छाप रहल बानी जा:

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सेवा में,
संचालक
भोजपुरिया डॉट कॉम

विषय: आपके वेबसाइट पर छपे तथ्यहीन खबर के संबंध में।

महोदय,
मीडिया को समाज का आईना कहा जाता है, लेकिन अगर आईना ही गलत तस्वीर पेश करे तो समाज की धारा दिशाहीन होने लगती है। आपने स्वर्गीय सुधाकर पांडेय की शोकसभा से संबंधित जो न्यूज अपने वेबसाइट में डाला है वह पूरी तरह से गलत है और किसी ने साजिश के तहत श्री आलोक कुमार तथा अन्य लोगों को बदनाम करने की कोशिश की है।

महोदय, आलोक कुमार ने स्वर्गीय सुधाकर पांडेय के प्रति श्रद्धा के कारण ही शोक सभा के संदर्भ में श्री अभय सिन्हा से बात की और शोकसभा का आयोजन किया। किसी को श्रद्धांजलि देने के लिये आयोजित सभा के लिए यह जरुरी नहीं होता कि कौन कहां है, और कौन शहर में है। यह तो श्रद्धा की बात होती है। श्री आलोक कुमार ने अपने सामर्थ के अनुसार पहल की और अपने दोस्तों से खर्च को शेयर किया, जिसे कतई गलत नहीं माना जा सकता है।

महोदय, आपसे आग्रह है कि खबर को सुधारा जाये। श्री अभय सिन्हा जी ने तो भोजपुरी फिल्म जगत के लोगों को एकत्रित किया, पैसे के संबंध में तो किसी से कोई चर्चा ही नहीं हुई, ना किसी से मांगा ही गया। आपने जिस भी किसी सूचना के आधार पर इसे छापा है वो पूर्णतया गलत है। महोदय, कुछ समाज विरोधी तत्व यह नहीं चाहते हैं कि हम भोजपुरियों की एकता बरकरार हो। महोदय कृपया इस तथ्य को नजर अंदाज ना करते हुए साजिश का पर्दाफाश करें।

प्रेषक
उदय भगत (पी. आर. ओ.)
श्री आलोक कुमार (संयोगिता फिल्मस)
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एह खंडन में भी उ सकरले बाडन कि ऊ पूरा खर्चा के अपना दोस्तन का बीच में शेयर (चंदा) कइलन। एह तरह ऊ खुद हमनी के खबर के प्रमाणिकता सत्यापित क देहलन। वइसे भोजपुरिया डॉट कॉम अपना कवनो खबर के प्रमाणिकता सत्यापित करे खातिर केहू आउर पर निर्भर ना रहेला, एहिजा कवनो खबर के छापे से पहिले ओकर सारा प्रमाण एकत्रित क लीहल जाला। आलोक कुमार के हम बतावल चाहेब कि भोजपुरिया डॉट कॉम के उनकरा से चाहे ओह लेख में जिक्र भइल कवनो व्यक्ति से कवनो निजी दुश्मनी नइखे। केहू के शोक-सभा के आयोजन खातिर श्रद्धा भइल त जरुरी बा, लेकिन का हमनी के संस्कारन में एह तरह के कवनो आयोजन के 13 दिन के पहिले करे के अनुमति बा? पहिले त एतना जल्दबाजी में ई आयोजन करे खातिर रउरा के कवन श्रद्धा मजबूर कइलस, जेकरा वजह से इंडस्ट्री के 60% प्रतिशत लोग के आजो खबर ना मिलला का वजह से शोक सभा में शरीक ना हो पइला के तकलीफ बा, आ ओकरा बाद मात्र 22,000 रुपया खातिर जवन छीछालेदर भइल, ऊ रउरा से बेहतर के जान सकेला?

किशन खदरिया
एकरा अलावा फिल्म निर्माता आ "भोजपुरी सिटी" के प्रकाशक किशन खदरिया का ओर से भी एगो मैसेज (SMS) मिलल बा, जवना में ऊ कहलन कि हॉल उनकर निजी ना ह, आ एह कार्यक्रम के दिन ऊ मुंबई से बाहर रहले।

भले ऊ हॉल खदरिया जी के निजी संपत्ति ना हवे, बाकिर एतना त सांच जरुर बा कि ओह हॉल के चलावेवाली संस्था से ऊ ज़ुडल बाडन। चूकिं खदरिया जी ओह दिन मुंबई में ना रहलन, ओह से उनका के एह पूरा घटना खातिर जिम्मेदार मानल उचित ना होई। वइसे भी उनुका के करीब से जाने वाला लोगन के कहनाम बा कि अगर खदरिया जी के एह घटना के जानकारी रहित, या अगर कुछ लोग उनुका से निहोरा करित त सुधाकर जी के सम्मान में ऊ खुद भी पूरा खर्चा वहन क लेतन।

मनोज टाइगर
एकरा अलावा अभिनेता मनोज टाइगर के एगो फोन कॉल आइल, जेमे ऊ अपना गलत-बयानी खातिर शर्मिन्दगी जाहिर कइला के बदला उल्टे धमकी देत कहलन कि भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री भोजपुरिया डॉट कॉम के खिलाफ कारवाई करे के आपन फैसला 2-3 दिन में ले ली। फोन के अंत में ऊ इहो बतवलन कि ऊ हमनी के फोन रेकार्ड क रहल बाडन, आ उनुका लगे "इंडिया टीवी" के कुछ रिपोर्टर बैठल बाडे सन। जब उनका से टीवी रिपोर्टरन से डायरेक्ट बात करावे के कहल गइल, त झुंझला के तुरंत फोन काट दिहलन। अपना नाम में टाइगर लगाये वाला व्यक्ति के गीदड- भभकी ना देवे के चाहीं। सभा में उपस्थित इंडस्ट्री के लोगन के बीच ज्यादा सहानुभूति बटोरे के उद्देश्य से अगर झूठ ना बोलले रहतन, त एतना बवाले ना भइल रहित। गलती सभका के होखेला, लेकिन ओकरा के सकारला से ऊ खतम होला, ना कि ओह पर गाल बजावला से।

भोजपुरिया डॉट कॉम आज भी अपना बात पर कायम बा। खाली फिल्मे इंडस्ट्री ना बल्कि समाज के कवनो  भी क्षेत्र से जुडल व्यक्ति आ संस्था से भोजपुरिया डॉट कॉम इहे अपील करता कि एहिजा छपल कवनो भी खबर के सत्यता पर प्रश्नचिन्ह लगा के आपन समय जाया ना करे, बल्कि परिपक्व सोच के साथ ओकर समाधान खोजे के प्रयास करे। एह मामला में जवन कुछ भी भइल ओकरा से भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के गरिमा के चोट त जरुर पहुँचल बा, लेकिन अगर कुछ लोग तनी मैच्योरिटी के परिचय देले रहित, त शायद इंडस्ट्री एह कलंक से बच जाइत।